टमाटर

tomato

1. खेत की तैयारी :-

2. किस्म का चयन:

देशी किस्म :- पूसा रूबी, पूसा-120, पूसा शीतल, पूसा गौरव, अर्का सौरभ, अर्का विकास, सोनाली संकर किस्मः– पूसा हाइब्रिड-1, पूसार हाइब्रिड-2, पूसा हाइब्रिड – 4, अविनाश-2, रश्मि तथा निजी क्षेत्र से शक्तिमान, रेड गोल्ड, 501, 2535 उत्सव, अविनाश, चमत्कार, यू.एस. 440 आदि ।

3. बीज की मात्रा:

एक हेक्टयर क्षेत्र में फसल उगाने के लिए नर्सरी तैयार करने हेतु लगभग 350 से 400 ग्राम बीज पर्याप्त होता है । संकर किस्मों के लिए बीज की मात्रा 150-200 ग्राम प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहती है ।

4. बीजोपचार : बुवाई पूर्व थाइरम / मेटालाक्सिल से बीजोपचार करे ताकि अंकुरण पूर्व फफून्द का आक्रमण रोका जा सकें ।

5. बुवाई की पद्धति –

नर्सरी में बुवाई हेतु 1 से 3 मी. की ऊठी हुई क्यारियाँ बनाकर फोर्मेल्डिहाइड द्वारा स्टेरीलाइजशन कर ले अथवा कार्बोफ्यूरॉन 30 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मिलावें । बीज को कार्बेन्डाजिम / ट्राइकोडर्मा प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित कर 5 से.मी. की दूरी रखते हुये कतारो में बीजो की बुवाई करें । बीज बोने के बाद गोबर की खाद या मिट्टी ढक दे और हजारे से छिड़काव ।

बीज उगने के बाद डायथेन एम-45 / मेटालाक्सिल छिड़काव 8-10 दिन के अंतराल पर करना चाहिए ।

25 से 30 दिन का रोपा खेतो में रोपाई से पूर्व कार्बेन्डिजिम या ट्राइकोडर्मा के घोल में पौधों की जड़ो को 20-25 मिनट उपचारित करने के बाद ही पौधों की रोपाई करें ।

पौधों को उचित खेत में 75 से.मी. की कतार की दूरी रखते हुए 60 से.मी. के फासले पर पौधों की रोपाई करें ।

मेड़ो पर चारो तरफ गेंदा की रोपाई करे । फूल खिलने की अवस्था में फल भेदक कीट टमाटर की फसल में कम जबकि गेंदें की फलियों / फुलों में अधिक अंडा देते है ।

6. खरपतवार नियंत्रण

आवश्यकतानुसार फसलों की निदाई-गुड़ाई करें । फूल और फल बनने की अवस्था में निंदाई-गुड़ाई नहीं करनी चाहिए ।

रासायनिक दवा के रूप में खेत तैयार करते समय फ्लूक्लोरेलिन (बासालिन) या से रोपाई के 7 दिन के अंदर पेन्डीमिथेलिन छिड़काव करें ।

7. सिंचाई : सर्दियों में 10-15 दिन के अन्तराल से एवं गर्मियों में 6-7 दिन के अन्तराल से हल्का पानी देते रहे । अगर संभव हो सके तो कृषकों को सिंचाई ड्रिप इरीगेशन द्वारा करनी चाहिए ।

8. कीट – व्याधि रोग प्रबंधन एवं उपचार

प्रमुख कीट – हरा तैला, सफेद मक्खी, फल छेदक कीट एवं तम्बाकू की इल्ली

प्रमुख रोग – आर्द्र गलन या डैम्पिंग ऑफ, झुलसा या ब्लाइट, फल सड़न

गर्मीयों में खेत की गहरी जुताई करें ।

पौधशाला की क्यारियों भूमि धरातल से ऊचीं रखें एवं फोर्मेल्डिहाइड द्वारा स्टेरीलाइजेशन कर ले ।

क्यारियों को मार्च अप्रेल माह में पोलिथिन शीट से ढके भू- तपन के लिए मृदा में पर्याप्त नमी होनी चाहिए ।

गोबर की खाद में ट्राइकोडमा मिलाकर क्यारी में मिट्टी में अच्छी तरह से मिला देना चाहिए ।

पौधशाला की मिट्टी को कॉपर ऑक्सीक्लोराईड के घोल से बुवाइ के 2-3 सप्ताह बाद छिड़काव करें ।

पौध रोपण के समय पौध की जड़ो को कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडमा के घोल में 10 मिनट तक डुबो कर रखे ।

पौध रोपण के 15-20 दिन के अंतराल पर चेपा, सफेद मक्खी एवं थ्रिप्स के लिए 2 से 3 छिड़काव इमीडाक्लोप्रिड या एसीफेट के करे । माइट की उपस्थिती होने पर ओमाइट का छिड़काव करें ।

फल भेदक इल्ली एवं तम्बाकु की इल्ली के लिए इन्डोक्साकार्ब या प्रोफेनोफॉस का छिड़काव व्याधि के उपचार के लिए बीजोपचार, कार्बेन्डाजिम या मेन्कोजेब से करना चाहिए । खड़ी फसल में रोग के लक्षण पाये जाने पर मेटालेक्सिल+मेन्कोजेब या ब्लाईटोक्स का घोल बनाकर छिड़काव करे। चूर्णी फफूंद होने सल्फर घोल का छिड़काव करें ।

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